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हम ख्वाबों के आईने में जिंदगी ढूंढते हैं shanvipublications@gmail.com

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कुछ तो कहता हूँ
हौसला थाली में दाल और सब्जी न होंने पर भी पड़ोसी को अपनी सम्पन्नता दिखाने का होता है . हौसला बड़ी बड़ी गाड़ियों के बीच किसी मजदूर द्वारा साईकिल निकाल कर ले जाने का नाम है . तमाम चीजों के आन लाइन हो जाने के बाद भी पेंशन पाने के लिए खुद को जीवित सिद्ध करने के बुजुर्ग के जीवट को हौसला कहते हैं . सरकारी स्कूल में पढ़ने के बावजूद अफसर बनने का ख़्वाब हौसला है
रात में पापा ने बच्चे की माँ से कहा ,
सुनो ,तुम्हें पता है ,राजू क्या मांग रहा था ,
माँ बोलीं ,
आजकल बहुत “नाटी” हो गया है ,
लगता है सोसायटी खराब हो गई है ,
स्कूल बदलना पड़ेगा ,
बट आई एम सीरियस पापा बोले
छोड़ो भी क्यों डिस्टर्ब करते हो , मैडम उवाच
आफ्टर आल तुम उसकी माँ हो ,
आई नो माई ड्यूटी ,डोंट टीच मी ,
उसे प्यार चाहिए था ,
तो ,
मुन्ना ,चुन्नू या लल्लू होना चाहिए था ,
तुम्हारी तरह ।
मंदिर जाया करो
मंदिरों की आँख होती है
जो तुम्हारे दिल के भीतर देख लेती है
वहाँ तुम
इंसान नहीं
हकीकत का आइना बन जाते हो
और
खुद से
झूठ नहीं बोल पाते हो
बस वही तो
प्रार्थना है
सच
अपने आप में ताकत है
जो मंदिर के भीतर
कदम रखते ही
पैदा हो जाता है
बिना किसी
पॉलीग्राफिक मशीन के
सच का सामना
तुम्हें
तुम्हारे भीतर के
सच्चे इंसान से मिला देता है
लैंप पोस्ट
तुम्हें क्या लगता है कि
मैं तुमसे कुछ मांगने के लिए खड़ा हूँ
और तुम घबरा गए
छोड़ो भी जाने दो
उजाले से किसी ने रोशनी मांगी है क्या!
जाने दो
मैं दूर से ही आत्मप्रकाश ले कर जा रहा हूँ
नाहक ही अपने विचारों में
खुद को छोटा मत करो
क्योंकि तुम मेरे लिए लैंप पोस्ट हो
मात्र किसी बुझते हुए दिए की लौ नहीं
पुस्तक संभावना से एक कविता
कवि
मदिरा के उफान को
धधकती हुई भट्ठी पर
उसके उतरने और ठंडा होंने से पहले ही पी सको
तो समझो , किसी कविता को जिया है तुमने ,उस विशेष क्षण में
और ऐसे ही क्षणों को मिला कर , जीवन बना सको ,तो समझो , किसी कवि को जन्म दिया है तुमने ,
हाँ , इसके बाद भी तुम कवि के निर्माता नहीं हो
जन्म देने और निर्माण करने में फर्क होता है
हाँ तुम महुए के उस वृक्ष की तरह हो , जिसे खुद भी मदिरा की तासीर का दर्द नहीं पता ,
एक कवि तासीर होता है सिर्फ तासीर
न कड़ाहे को पता है , न भट्ठी को और न ही महुए को ,
कि उस ने उबाल कर बनाया क्या है ।
यहाँ तक कि शराबी को भी मदिरा की तासीर का दर्द नहीं पता होता ।
जब कुछ नहीं होता तो कुछ होता है ------
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